प्राइड परेड में समाज को यह संदेश देने की कोशिश की जाती है कि हम भी इस समाज कि हिस्सा हैं और हम कुछ भी गलत नहीं कर रहे हैं। हम वो कर रहे हैं जो हम चाहते हैं, हम आपसे प्यार करते हैं और हम खुद से भी प्यार करते हैं, साथ ही हमें आपके प्यार की भी ज़रूरत है। यहाँ हम, हम होते हैं बिल्कुल रियल, कोई समाज की बंदिश नहीं, कोई दकियानूसी नियम नहीं।
ये मेरी तीसरी प्राइड परेड है। प्राइड मार्च एक अलग तरह का फेस्ट है जहाँ सैकड़ों जाने-पहचाने और अनजाने लोग एक जगह पर इकट्ठा होते हैं, रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं, डांस करते हैं, नारे लगाते हैं, एक दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं और एक रणनीति बिंदु से गंतव्य तक चलते हैं … बहुत सारे लोग इसमें इकट्ठा होते हैं, और सबसे अच्छी बात यह है कि उनके माता-पिता, मित्र और रिश्तेदार इसके सदस्यों का समर्थन करते हैं और मार्च में साथ चलते हैं। पहले प्राइड परेड में मेरी दोनों बहने भी मेरा हौसला बढ़ाने आयी थीं, मुझे बहुत मज़ा आया था। इसी तरह दूसरे परेड को भी मैंने बहुत एन्जॉय किया था।
प्राइड जिंदगी को सेलिब्रेट करने का फेस्ट है… यह बताता है कि लोगों का जीवन रंगीन है।प्राइड एक ऐसी जगह है जहाँ आप सभी रंगों को एकजुट होते देखते हैं और आंखों में खुशी लाते हैं। इसके अलावा, प्राइड एक ऐसी जगह है जहाँ किसी को भी उसके कपड़ों के अनुसार नहीं आंका जाता कि वे क्या पहन रहे हैं और किससे प्यार करते हैं.. इसलिए हम देखते हैं कि कुछ लडके हील्स, साड़ी, लंबी पोशाक आदि कुछ भी पहनते हैं .. और कुछ  लड़कियाँ टॉमबॉय या जैसी उनकी इच्छा हो उस अनुसार कपड़ें पहनती हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट का एक्ट 377 कि ऐतिहासिक फैसला बहुत देरी से आया है मगर ये एक बेहतरीन शुरुआत है, हम जैसों ने जन्म से ही ये दर्द झेला है,मगर समाज के ये दकियानूसी नियम अब हम नहीं झेल सकते। ये फैसला भारत में हम जैसों के लिए, हमारी फैमिली के लिए नयी ज़िंदगी की तरह है,नये भारत की दिशा में ये एक बड़ा कदम है जहाँ समाज हम जैसों को और बेहतर तरीके से समझे और हमें भी स्वीकार करना शुरू करे। इसलिए मेरी ये परेड बहुत ज़्यादा स्पेशल रही.. और हम सबको वाकई प्राइड जैसा महसूस हुआ।
अंत में बस यही कहूँगा कि…
उपहास  उड़ाने  वालों  ये  याद  रहे
उस ईश्वर ने हमें भी प्यार से बनाया है!!

Written by: अनुराग गुप्ता


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